डूबता हुआ ये सूरज , समुन्दर का ये किनारा ,
चाहता है दिल,बार बार देखे हम ये नज़ारा ,,
आसमान में उडती ये चिड़ियाँ,टूट ता हुआ वो तारा,
चाहता है दिल, काश की हो जाए ये सब हमारा,,
लहरों पर चलती वो कश्तियाँ ,समुन्दर में तैरती वो मछलियाँ,
चाहता है दिल,कैद हो जाये इस पल में हम सदियाँ,,
बनता यहाँ भी एक बाग़ ,और उसमे उडती रहती तितलियाँ,
चाहता है दिल,देख कर उन्हें हम भूले अपनी सारी गलतियाँ,,
काश की होता ज़िन्दगी में हर ऱोज यही सवेरा,,
हो गया है हमें प्यार इस समह से,चाहता है दिल इस पल में कभी न हो अँधेरा,,,,,,,,,,,,
Tuesday, September 27, 2011
Wednesday, August 17, 2011
आसान नहीं होता भुलाना वो चेहरा , दिल को जो दे जाता है घाव गहरा ,,,,,
खुल कर ये दिल जी नहीं पा रहा , हर पल साथ जो है उनकी यादों का पहरा,,,,,,,,,,
प्यार उनका था हमारे लिए खुशियों का बसेरा,,,,,
तोड़ कर दिल उन्होंने है हमारा हर सपना बिखेरा,,,,,,,,,
हर पल पूछते है खुदा से क्या आएगा ज़िन्दगी में हमारी फिर से वही सवेरा,,,,,
क्या आएगा फिर से वही वक़्त जिसमे था हमारा हर पल सुन्हेरा,,,,,,,,,,,,,
खुल कर ये दिल जी नहीं पा रहा , हर पल साथ जो है उनकी यादों का पहरा,,,,,,,,,,
प्यार उनका था हमारे लिए खुशियों का बसेरा,,,,,
तोड़ कर दिल उन्होंने है हमारा हर सपना बिखेरा,,,,,,,,,
हर पल पूछते है खुदा से क्या आएगा ज़िन्दगी में हमारी फिर से वही सवेरा,,,,,
क्या आएगा फिर से वही वक़्त जिसमे था हमारा हर पल सुन्हेरा,,,,,,,,,,,,,
Sunday, August 1, 2010
बचपन,,,,,
कुछ पल अतीत में चले,
बचपन की कुछ यादों से खेले ,
बड़ी मुश्किल से आँख खुल पाती थी,
फिर भी माँ नहाने ले चली जाती थी ,,
बड़ी देर तक पानी से खेला करते थे,
सर्दी हो जायेगी पापा कुछ यु डांट दिया करते थे ,,
ऱोज नए कपड़ो के लिए तंग किया करते थे,
वो जो न मिले तो नंगा ही घूम लिया करते थे ,,
पापा के साथ जब नाश्ता करते थे,
खिड़की से दोस्त मैच का इशारा करते थे,,
पेट के दर्द का बहाना बनाकर स्कूल से छुट्टी लिया करते थे,
पापा जो चले गए दौड़ कर खेलने चले जाया करते थे,,
हर ऱोज एक पडोसी का सिर्र फोड़ा करते थे,
डंडा लेकर मारने वो चले आया करते थे,,
देख कर उन्हें हमे छोड़ कर सब भाग जाया करते थे,
अपनी आँखें बंद कर के हम मार खाने हाथ बढाया करते थे ,,
मासूम सा चेहरा और प्यारी सी मुस्कान जब वो देखा करते थे,
डंडा फ़ेंक हमें पप्पी दे जाया करते थे,,
खेलते खेलते पापा के आने का वक़्त भूल जाते थे,
देर होती थी फिर भी पापा से पहले घर पहुँच जाते थे,,
अपनी पसंद के पकोड़े देख कर रहा नहीं जाता था,
बिना हाथ धोये एक पकोड़ा अन्दर चले जाया करता था,,
पापा जब डांटना शुरू कर देते थे,
नींद का बहाना बनाकर माँ के पास चले जाया करते थे ,
जब लोरियां गाकर हमे माँ सुलाया करती थी,
पड़ोसियों की नींद खुल जाया करती थी,,
बचपन की कुछ यादों से खेले ,
बड़ी मुश्किल से आँख खुल पाती थी,
फिर भी माँ नहाने ले चली जाती थी ,,
बड़ी देर तक पानी से खेला करते थे,
सर्दी हो जायेगी पापा कुछ यु डांट दिया करते थे ,,
ऱोज नए कपड़ो के लिए तंग किया करते थे,
वो जो न मिले तो नंगा ही घूम लिया करते थे ,,
पापा के साथ जब नाश्ता करते थे,
खिड़की से दोस्त मैच का इशारा करते थे,,
पेट के दर्द का बहाना बनाकर स्कूल से छुट्टी लिया करते थे,
पापा जो चले गए दौड़ कर खेलने चले जाया करते थे,,
हर ऱोज एक पडोसी का सिर्र फोड़ा करते थे,
डंडा लेकर मारने वो चले आया करते थे,,
देख कर उन्हें हमे छोड़ कर सब भाग जाया करते थे,
अपनी आँखें बंद कर के हम मार खाने हाथ बढाया करते थे ,,
मासूम सा चेहरा और प्यारी सी मुस्कान जब वो देखा करते थे,
डंडा फ़ेंक हमें पप्पी दे जाया करते थे,,
खेलते खेलते पापा के आने का वक़्त भूल जाते थे,
देर होती थी फिर भी पापा से पहले घर पहुँच जाते थे,,
अपनी पसंद के पकोड़े देख कर रहा नहीं जाता था,
बिना हाथ धोये एक पकोड़ा अन्दर चले जाया करता था,,
पापा जब डांटना शुरू कर देते थे,
नींद का बहाना बनाकर माँ के पास चले जाया करते थे ,
जब लोरियां गाकर हमे माँ सुलाया करती थी,
पड़ोसियों की नींद खुल जाया करती थी,,
दरवाज़ा खटखटाकर वो थक जाया करते थे,
और हम प्यारी सी नींद में चले जाया करते थे ,प्यारी सी नींद में चले जाया करते थे,,
Friday, July 16, 2010
Friday, July 2, 2010
Saturday, June 26, 2010
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